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अनर्गल अलाप

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अनर्गल अलाप      देश को सशक्त देश के नागरिक बनाते हैं और उस सशक्तिकरण को लम्बे समय तक बनाए रखने का दायित्व उस देश के वैचारिक विद्वानों का होता है। यदि बात लोकतंत्र के सापेक्ष में की जाए तो न्यायपालिका और मीडिया की यह जिम्मेदारी बनती है कि देश को मजबूत बनाने के लिए सदैव तत्पर रहें। विगत कई वर्षों से कुछ ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जोकि भारत में पहले कभी नहीं हुई। कुछ नए शब्दों का प्रादुर्भाव हुआ है या यूं कहें कि इन शब्दों को जबरन बनाया गया है। असहिष्णुता – ये क्या होता है, यह तो बाद की बात है, आज भी इसको बोलने में सामान्य लोगों को दिक्कत होती है। अब रही बात असहिष्णुता की तो जो लोग सामान्य लोगों की श्रेणी से भिन्न हैं और उन्हें अति विशिष्ट श्रेणी में रखा जाता है, वे लोग कहते हैं कि देश में असहिष्णुता है, तो शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो जो उन महाशय की राजनीतिक मनोदशा को न समझ सका हो। हां अगर यही बात देश की आम जनता ने कही होती तो बात विचारणीय हो जाती है। लेकिन कुछ लोग आपने राजनीतिक स्वार्थ के कारण जबरन ऐसी बातों को फैलाने में लगे रहते हैं, जिनका जन-मानस से प्रत्...