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Showing posts from March, 2018

लीक होते प्रश्न-पत्र ( व्यंग )

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        लीक होते प्रश्न-पत्र             भारतीय प्रश्न-पत्र लीक के इतिहास को खोलकर देखने पर आपको भारतीय युवाओं के होनहार होने के कई प्रमाण मिल जाएगेँ। बस सरकार उन्हें इस सराहनीय कार्य के लिए प्रमाण-पत्र नहीं दे पा रही है। ये भी एक कला है और हां काम तो बेहद मेहनत का है, साथ में रिस्क अलग से है। बेरोजगारी ने तो करेले को नीम पर चढ़ा दिया है। सरकारी संस्थान भी अपनी इंटरनेट सुरक्षा इतनी अधिक रखते हैं कि कोई अवतारी व्यक्ति ही सेंध लगा सकता है। और आप ये बात अच्छे से जानते हैं कि भारत में अवतारी व्यक्तियों की कमी नहीं है। हर वर्ष ऐसे कई अवतार हो जाते हैं, जो हमारे युवाओं की परीक्षा के दबाव को कम करने में अपना सहयोग दे देते हैं। इस परोपकार के बदले में अच्छी रकम के साथ उन युवाओं के करोड़पति माता-पिता का आशिर्वाद भी मिल जाता है। चूंकि भारत धार्मिक देश है, तो इतना पुण्य तो हर कोई कमाना चाहता है। हां कुछ एक निठल्ले लोग हैं, जो दिन-रात दिमाग घिस-घिस कर पढ़ते रहते हैं, औऱ सोंचते हैं कि वे पास भी होंगे और अच्छी नौकरी भी पा जाएगें। ...

जीवन की दौड़

  जीवन की दौड़ कल्पनाओं के अनंत आकाश में गोते खाता मन, कुछ पाने की तलास में ठोकर खाता तन, उलझा हुआ हूं पहेलियों में बीत रहा जीवन, दीप्त प्रतिस्पर्धा की दोपहर में झुलस रहा भोल...

‘गांव’

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               ममता और समरसता से परिपूर्ण ‘ गांव ’            विकास की अन्धी दौड़ में मनुष्य अपनी सभ्यता से विमुख होता जा रहा है, और आज यह स्थिति इतनी विकट हो गई है कि हम अपने ही परिवार से दूर होते जा रहे हैं। व्यक्ति एकाकी जीवन में ही अपनी प्रगति का समझता है। अपनों से दूर होकर सिर्फ अपने लिए आधुनिक सुविधाएं एकत्रित कर लेना मात्र ही व्यक्ति के जीवन का उद्देश्य रहा गया है। इसका परिणाम यह है कि व्यक्ति के पास सर्वसुविधाएं होने के बावजूद भी वह तनाव में जीवन जीता है और उसी तनाव में स्वयं को समाप्त भी कर लेता है। इन परिस्थितियों का एक मात्र कारण व्यक्ति का व्यक्तिवादी होना है। यदि इसी बात को सरल शब्दों में कहें तो हम यह भी कह सकते हैं कि आज के परिदृष्य में हर एक व्यक्ति स्वार्थी होता जा रहा है, जो सिर्फ और सिर्फ आपने विषय में ही सोचता है।           यदि हम गांव और शहरों की तुलना करें तो ये बात सभी जानते हैं कि गांव का ...

जब कृष्ण बने मुरारी

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                                         जब श्रीकृष्ण बने मुरारी                   द्वापर युग में प्रागज्योतिषपुर नामक एक राज्य था , जिस पर भौमासुर नामक राक्षस राज किया करता था। भौमासुर की मां पृथ्वी थीं।। भौमासुर यह बात भाली-भांति जानता था कि कोई भी मां अपने पुत्र की मृत्यु की कामना नहीं कर सकती है। इसीलिए भौमासुर ने ब्रम्हा की कठोर तपस्या करके वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु उसकी मां की इच्छा से ही हो। इस वरदान के कारण भौमासुर अजेय हो गया। अपनी आसुरी प्रवृत्ति के कारण तीनों लोकों में उसका आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा। भौमासुर का सेनापति जिसका नाम मुरार था , उसकी सहायता से भौमासुर ने देवताओं को परास्त करके उन्हें स्वर्ग से निष्कासित कर दिया। भौमासुर की तरह ही मुरार भी अजेय था क्योंकि उसकी पुत्री अहिलावती कामाख्या देवी की उपासक थी और उसे कामाख्या देवी ने वरदान दिया था कि उसकी सदैव सहायता करेंगी।         ...