लीक होते प्रश्न-पत्र ( व्यंग )


       लीक होते प्रश्न-पत्र



          भारतीय प्रश्न-पत्र लीक के इतिहास को खोलकर देखने पर आपको भारतीय युवाओं के होनहार होने के कई प्रमाण मिल जाएगेँ। बस सरकार उन्हें इस सराहनीय कार्य के लिए प्रमाण-पत्र नहीं दे पा रही है। ये भी एक कला है और हां काम तो बेहद मेहनत का है, साथ में रिस्क अलग से है। बेरोजगारी ने तो करेले को नीम पर चढ़ा दिया है। सरकारी संस्थान भी अपनी इंटरनेट सुरक्षा इतनी अधिक रखते हैं कि कोई अवतारी व्यक्ति ही सेंध लगा सकता है। और आप ये बात अच्छे से जानते हैं कि भारत में अवतारी व्यक्तियों की कमी नहीं है। हर वर्ष ऐसे कई अवतार हो जाते हैं, जो हमारे युवाओं की परीक्षा के दबाव को कम करने में अपना सहयोग दे देते हैं। इस परोपकार के बदले में अच्छी रकम के साथ उन युवाओं के करोड़पति माता-पिता का आशिर्वाद भी मिल जाता है। चूंकि भारत धार्मिक देश है, तो इतना पुण्य तो हर कोई कमाना चाहता है। हां कुछ एक निठल्ले लोग हैं, जो दिन-रात दिमाग घिस-घिस कर पढ़ते रहते हैं, औऱ सोंचते हैं कि वे पास भी होंगे और अच्छी नौकरी भी पा जाएगें।


         एक बात से तो आप सहमत होंगे ही कि मेहनती लोगों का भला तो भगवान भी करते हैं। इसलिए इन मेहनती युवाओं की मदद राजनीति के भगवान कर  रहे हैं, यानी कि नेता जी। करें भी क्यों न, उनका ये फर्ज जो है। वैसे भी किसी की रोजी-रोटी पर लात मारना पाप होता है। इस लीक होकर बह रही पास करावनी गंगा में सभी गोते लगा-लगा कर अपने जीवन को धन्य बना रहे हैं। कुछ एक तो इस गंगा का जल भर कर अपने घर भी ले जाते हैं।


          समस्या ये नहीं कि पेपर लीक कैसे हो जाते हैं, बल्कि ये है कि पेपर लीक की बात पता कैसे चल जाती है? ऊपर से लेकर नीचे तक की सेटिंग की जाती है, पैसों के स्वीमिंग पुल में डाल-डाल कर सभी को खुश किया जाता है, पर पता नहीं कि ये ईमानदारी का कीचड़ कोन फैला देता है? सारा किया-कराया बर्बाद हो जाता है। देश की बेरोजगारी को कम किए जाने का प्रयास निरर्थक हो जाता है।


           अब तुरंत सरकारी सिस्टम को सक्रीय किया जाता है कि रंग में भंग डालने वाले की तलाश की जाए। कुछ एक लोग पकड़े भी जाते हैं। फिर सफर चालू होता है सरकारी आराम गृह का, जहां पर सरकार की ओर से सभी सुविधाएं दी जाती है, हां बस थोड़ा सेटिंग तो करनी ही पड़ेगी। लोगों को लगता है कि पेपर लीक कराने वाले परोपकारी लोग अब इस दुनिया से विलुप्त हो गए हैं। परन्तु कुछ ही दिनों में हो जाता है एक नया अवतार। भारत के महान युवाओं के परीक्षा जन्य कष्टों को हरता है। और फिर यही भारत के महान युवा गर्व से सीना तानकर कहते हैं कि इस देश का कुछ नहीं हो सकता है, यहां पर बहुत भ्रष्टाचार है।

Comments

  1. Ek dam satik kataksha Bharat ki vyavastha per

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  2. पढ़ने और प्रतिपुष्टि के लिए आभार

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