भारतीय मानसिकता
भारतीय मानसिकता हम भारतीयों को दुसरों के विचारों और संस्कृति ने हमेशा ही अपनी ओर आकर्षित किया है। हमनें कभी भी अपनी विरासत को ठीक से न जाना है और न ही समझा है। वैदिक भारत से आज के आधूनिक भारत के बीच के समय में हमारे देश ने अनेकों आक्रमण झेले हैं। अनेकों विचारों और संस्कृतियों को हम पर थोपा गया है। जिसके प्रभाव के कारण हम यह भूल गये हैं कि वास्तव में हम कौन हैं ? बस उतना ही जानते हैं जितना विदेशियों ने हमें हमारे विषय में बताया है। वास्तव में हमें यह सब समझनें का अवसर ही नही मिला है। जैसे हनुमान जी अपना बल भूल गए थे वैसी ही स्थिति आज हमारी है बस जरूरत है तो एक जामवन्त की जो हमें हमारे बल से परिचित कराए। हम भारतीयों की एक विशेषता यह भी है कि हम अपने आप को स्वयं के दृष्टिकोण से कभी भी नही देखते हैं। सिर्फ दूसरों की कही बात का अनुसरण करते रहते हैं। पिछलग्गू बनना तो हमारे स्वभाव में बस गया है। आधूनिकता की आंधी में हम उन विदेशियों का अंधा अनुकरण करते हैं जिन्हें वास्तव में जीवन जीने की कला हमनें सिखाई है। हमारी परम्पराओं, संस्कृति और जीवन जीने के तौर तरीकों को अंगीकृत करके विदेश...