तानाशाही प्रवृत्ति की परिवारवादी पार्टी
तानाशाही प्रवृत्ति की परिवारवादी पार्टी दुनिया के सभी देशों में आरम्भ में राजतंत्र रहा है और वर्तमान में भी कुछ देशों में संकेतिक रूप से राजतंत्र की व्यवस्था लागू है। लेकिन जिन देशों ने राजतंत्र को समाप्त करके जनतंत्र की व्यवस्था को अपनाया उन देशों में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां पर किसी एक परिवार का दबदबा कायम हो। क्यूंकि देश किसी एक परिवार की जागीर नहीं होता है। जिन देशों में तनाशाही की व्यवस्था है सिर्फ वहीं आपको परिवार वाद देखने को मिल सकता है। भारत में आजादी के बाद से ही एक परिवार विशेष का राजनीति में वर्चस्व रहा है। और यह वर्चस्व इतना गहरा रहा है कि उस पार्टी की कमान और सर्वेसर्वा हमेशा से परिवारिक विरासत बन कर रहा गया है। कहने को तो वे स्वयं को लोकतांत्रिक पार्टी कहते हैं पर वास्तव में वह परिवार वाद की परम्परा को आगे बड़ाने वाली पार्टी के अतिरिक्त कुछ नही है। अच्छे और कदावर नेताओं के होने के बावजूद आज उस परिवारवाद की मानसिकता से ग्रसित पार्टी की स्थिति विलुप्त प्राय सी ही गई है। फिर भी उनके मन और मस्तिष्क से वंशवाद का कीडा समाप्त नही हुआ है। उस पार्टी या यूं कहें कि उस ...