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Showing posts from August, 2017

आप किस नम्बर के भारतीय नागरिक हैं ?

भारत का पहला नागरिक राष्ट्रपति होता है, ये तो हम सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि दूसरा, तीसरा और चौथा नागरिक कहां आता है? नहीं न। हम आपको बताते हैं, दरअसल भारतीय गृह मंत...

आधुनिकता की आंधी

आधुनिकता की आंधी विश्व का हर एक देश अपने आपको तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रतिदिन नए आविष्कार हो रहे हैं। विज्ञान जगत अपने चरम की ओर बढ़ता जा रहा है। इस दौड़ में भारत भी पीछे नही है। भारत भी दुनिया के अन्य प्रमुख देशों की तरह आधुनिक विज्ञान जगत में महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है। आधुनिकता क्या है?  वास्तव में हमारे देश के नागरिकों को आज भी आधुनिकता की सही जानकारी नही है। विशेष कर हमारे युवा जो आधुनिकता को सिर्फ आकर्षक कपड़े पहनना और नए संसाधनों से युक्त रहना  समझते हैं। आधुनिकता का मतलब अपने विचारों को आज के वर्तमान वैश्विक विचारों से जोड़ना है। हमारे विचार नवीन हो, जिनमें वैज्ञानिकता भी सामिल हो आधुनिकता दिखावे की वस्तु मात्र नही है। हम तभी आधुनिक बन सकते हैं जब हमारे  विचारों में नवीनता और वैज्ञानिक सोच शामिल हो सके। हमें नई तकनीकि की आदत पड़ चुकी है, हाथों में मोबाइल या कम्प्यूटर को लेकर हम स्वयं को आधुनिक कहेंगे तो यह बेईमानी होगी। आंधी का प्रभाव जब आंधी चलती है तो सबकी आंखें बन्द हो जाती हैं और सभी को प्रभावित करती है। ऐसा ही कुछ आधुनिकता की इस आंध...

भारतीय संस्कृति : चरित्र की संस्कृति

भारतीय संस्कृति : चरित्र की संस्कृति हम सभी बड़े गर्व से कहते हैं कि भारत देश दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारी जनसंख्या में युवाओं की अधिकता है। परन्तु मात्र युवा होना ही हमारे लिए गर्व की बात हो यह बेईमानी है। वास्तव में किसी देश युवा तभी सामर्थ्यवान होता है , जब युवाओं उस देश की संस्कृति से जुड़ा हुआ हो। जिस देश युवा अपनी संस्कृति से विमुख हो जाता है वह स्वत: ही पथ भ्रष्ट हो जाता है। जब हम संस्कृति की बात करते है तो हम अपने भारत देश की संस्कृति पर गर्व करते हैं। किसी देश के नागरिकों का चरित्र ही उस देश की संस्कृति का प्रतिबिम्ब होता है। जिस भारत देश को हम माता कहते हैं , यह  हमारी संस्कृति ही है कि हम अपनी जन्मभूमि को माता का मानते देते हैं। लेकिन आज का युवा अपनी मूल संस्कृति से भटक चुका है , वह अपने स्वर्णिम इतिहास को भूलकर दूसरों की कही बात का अनुसरण करता है।वास्तव में उस भारत के नागरिकों का चरित्र आज के आधुनिक नग्नता वाले नागरिकों से भिन्न रहा है। श्रीराम जैसे चरित्र के पुरुष और सीता , अनुसुइया , सावित्री जैसी नारियों का यह देश रहा है। हमनें कभी भौतिक सुखों की चाह में...