भारतीय संस्कृति : चरित्र की संस्कृति हम सभी बड़े गर्व से कहते हैं कि भारत देश दुनिया का सबसे युवा देश है। हमारी जनसंख्या में युवाओं की अधिकता है। परन्तु मात्र युवा होना ही हमारे लिए गर्व की बात हो यह बेईमानी है। वास्तव में किसी देश युवा तभी सामर्थ्यवान होता है , जब युवाओं उस देश की संस्कृति से जुड़ा हुआ हो। जिस देश युवा अपनी संस्कृति से विमुख हो जाता है वह स्वत: ही पथ भ्रष्ट हो जाता है। जब हम संस्कृति की बात करते है तो हम अपने भारत देश की संस्कृति पर गर्व करते हैं। किसी देश के नागरिकों का चरित्र ही उस देश की संस्कृति का प्रतिबिम्ब होता है। जिस भारत देश को हम माता कहते हैं , यह हमारी संस्कृति ही है कि हम अपनी जन्मभूमि को माता का मानते देते हैं। लेकिन आज का युवा अपनी मूल संस्कृति से भटक चुका है , वह अपने स्वर्णिम इतिहास को भूलकर दूसरों की कही बात का अनुसरण करता है।वास्तव में उस भारत के नागरिकों का चरित्र आज के आधुनिक नग्नता वाले नागरिकों से भिन्न रहा है। श्रीराम जैसे चरित्र के पुरुष और सीता , अनुसुइया , सावित्री जैसी नारियों का यह देश रहा है। हमनें कभी भौतिक सुखों की चाह में...