आधुनिकता की आंधी
आधुनिकता की आंधी
विश्व का हर एक देश अपने आपको तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रहा है। प्रतिदिन नए आविष्कार हो रहे हैं। विज्ञान जगत अपने चरम की ओर बढ़ता जा रहा है। इस दौड़ में भारत भी पीछे नही है। भारत भी दुनिया के अन्य प्रमुख देशों की तरह आधुनिक विज्ञान जगत में महत्वपूर्ण स्थान बना चुका है।आधुनिकता क्या है?
वास्तव में हमारे देश के नागरिकों को आज भी आधुनिकता की सही जानकारी नही है। विशेष कर हमारे युवा जो आधुनिकता को सिर्फ आकर्षक कपड़े पहनना और नए संसाधनों से युक्त रहना समझते हैं। आधुनिकता का मतलब अपने विचारों को आज के वर्तमान वैश्विक विचारों से जोड़ना है। हमारे विचार नवीन हो, जिनमें वैज्ञानिकता भी सामिल होआधुनिकता दिखावे की वस्तु मात्र नही है। हम तभी आधुनिक बन सकते हैं जब हमारे विचारों में नवीनता और वैज्ञानिक सोच शामिल हो सके। हमें नई तकनीकि की आदत पड़ चुकी है, हाथों में मोबाइल या कम्प्यूटर को लेकर हम स्वयं को आधुनिक कहेंगे तो यह बेईमानी होगी।
आंधी का प्रभाव
जब आंधी चलती है तो सबकी आंखें बन्द हो जाती हैं और सभी को प्रभावित करती है। ऐसा ही कुछ आधुनिकता की इस आंधी ने भी किया है। हम सब आंख बन्द करके इससे प्रभावित हो गए हैं, लेकिन किसी ने इसकी वास्तविकता को नही जाना है।आज आधुनिकता के नाम पर सिर्फ अंग प्रदर्शन किया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति इस नग्नता पर रोक लगाने का प्रयास करता है तो उसे पुराने ख्यालों का व्यक्ति कहा जाता है। परन्तु किसी ने यह नही सोचा कि नग्नता को हम आधुनिकता से कैसे जोड़ सकते है।
यदि कम कपड़े पहनना ही आधुनिकता होती है, तो हर गाय और भैंस को हमसे अधिक आधुनिक होना चाहिए।
वास्तविकता यह है कि आधुनिकता को पहनावे में सीमित रखना मूर्खता है। पहनावा तो व्यक्ति की संस्कृति और समाज पर निर्भर करता है जबकि आधुनिकता उसके विचारों को प्रदर्शित करती है।
अब तो जागो
आपकी धारणा क्या है, यह आप पर निर्भर करता है। बस हमें इतना ही ध्यान रखना चाहिए कि आधुनिकता की आंधी में हम अपनी मूल संस्कृति और सभ्यता से भटक न जाए और बाद में हमें पता चले कि हमने आधुनिकता को भी गलत तरीके से पहचाना है।हमें इतनी ही सावधानी रखनी है कि अपनी संस्कृति और परम्परा के साथ विचारों की आधुनिकता को समेट कर विश्व मंच में आगे बढ़ना है। यदि हम ऐसा करते हैं तभी खुद को आधुनिक कहने के हकदार होगें।
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