कुछ शर्म करो
आज के समय में जब हमारा
नैतिक पतन होता जा रहा तो हम अपनें में सुधार की जगह अब हिन्दू भगवानों पर उँगली
उठाने लगे हैं । जिसको देखो बस श्री कृष्ण पर आरोप लगाने लगता है । पर उसनें शायद ही
उसने कभी श्री कृष्ण का अध्ययन किया हो । सात दिन की आयु में पूतना का वध, पाँच
वर्ष की आयु में रहस्य लीला ( रास लीला ) की और ग्यारह वर्ष में कंश का संहार किया
। पर हम सिर्फ 16108 रानियो के विषय में ही जानते हैं या बात करते हैं ,पर वो भी
अधूरी । इतनी संख्या में रानियों के बावजूद वह पूर्ण महायोगी थे । सिर्फ स्त्री
सुरक्षा के लिये उन्होंने ऐसा किया ।
हमारा पतन इतना हो चुका है
कि “ कलिकाल बेहाल किये सबही कोउ नही माने अनुजा तनुजा “ की स्तिथि आ चुकी है । हमें
रिस्ते दिखाई देना बन्द हो चुके हैं । सिर्फ स्त्री पुरुष के अलावा हमें समझ में
ही कुछ नही आता है , और हम अपनें में सुधार की जगह ईश्वर पर संदेह करते हैं । अपनी
सभ्यता को समाप्त करनें में तुले हैं और कहते हैं कि हम सभ्य हैं । जिस देश को
रिस्तों के पवित्र बन्धनों से पूरी दुनिया जानती है , जहाँ पर पशुओं में भी यह
ध्यान रखा जाता था कि पिता का पुत्री से सम्बंध न होने पाए वहाँ पर कुछ ऐसे भी
चरित्र वान व्यक्ति हैं जो खुद को श्री कृष्ण से उत्तम सिद्ध करना चाहते हैं । “ ते नर बिनु पूछ विसाना “ की स्तिथि है , कामुकता ने हमें पशुओं से भी तुच्य
बना दिया है । दुनिया में जिस तरह से संक्रमण फैल रहें उसे कहने की आवश्यकता नही
है ।
बस आज अगर जरूरत है तो खुद का आत्मनिरिक्षण करने
की और अपने धर्म के साथ साथ संस्कृति की
रक्षा की जिसके कारण आज हम हैं और हमारा अस्तित्व है । अगर समय रहते हम नही जागे
तो पछतावे के सिवा कुछ नही बचेगा ।
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