मित्रों नमस्कार आशा है कि आप सभी स्वस्थ्य होगें आज हम बात करेंगें अपनी बुरी आदतों की जैसे मेरी बिरी आदतो मे से एक है दूसरों की निंदा करना ।ग्रन्थों मे भी लिखा है कि निंदा करना अनुचित कार्यों मे से एक है।हम सब अपने दैनिक जीवन मे निंदा रुपी रस का पान करते रहते हैं।वैसे यह रस बहुत ही स्वादिस्ट हेता है। पर हमे अपनी कमियों पर ध्यान देना चाहिए न कि दूसरों की कमियों पर। लेकिन अगर हम दूसरों की कमियों से सीखते है तो हगारा नजरिया सही होगा और हम अपने जीव न की दिशा व दशा दोनो को सुधार और निकार सकते हैंं। हम आज ही यह प्रण करते है कि किसी की भी निंदा नही करेंगें।
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धर्म आखिर क्या धर्म है क्या ? सबके अपने विचार होते हैं। पर मेरा मानना है कि धर्म पुस्तक मे लिखी कोई बात नही होती । धर्म शब्द का वास्तविक अर्थ कर्तव्य़ों से है । व्यक्ति समाज मे जिस पद पर है(पिता, पुत्र, पत्नी आदि) उस का निर्वाह उचित तथा मर्यादित होकर करे, यही उसका धर्म है। यदि आप अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रहे हैं तेो आप धर्म परायण हैं। जरूरी नही कि आप मुझसे सहमत हों ,पर यदि गहनता से विचार किया जाये तो आप मुझसे सहमत हो सकते हैं। ...