दलित विरोधी सवर्ण
'दलित' विरोधी 'सवर्ण' देश की राजनीति में भले ही स्थिरता दिख रही हो पर सामाजिक अस्थिरता बढ़ती जा रही है, जिसका एक मात्र कारण सरकार की गलत नीतियां हैं। भारतीय संविधान में न्यायपालिका को स्वतंत्र अस्तित्व दिया है परन्तु व्यवस्थापिका हर बार न्यायपालिका के कार्य क्षेत्र में हस्ताक्षेप करके संविधानिक व्यवस्था को छिन्न-भिन्न कर रहा है। ऐसा ही कुछ sc-st अधिनियम को लेकर भी हुआ। कोई भी कानून ऐसा नहीं होता जिसमें कमियां न हो और यदि उन कमियों की वजह से किसी नागरिक के संविधानिक अधिकारों का हनन हो रहा हो तो सुप्रीम कोर्ट के पास यह अधिकार है कि वह उस कानून में परिवर्त्तन कर सकता है। ऐसा ही ही कुछ sc-st अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट ने किया। कोर्ट ने आंकड़ो के आधार पर कहा कि ज्यादातर केस फर्जी होते हैं, जिसकी वजह से निर्दोष सवर्णों को न्याय नहीं मिल पाता। sc-st अधिनियम की विसंगतियों को दूर करते हुए सिर्फ अग्रिम जमानत का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट द्वारा किया गया। परन्तु को...