देश प्रेम

                  देश प्रेम

       
नागरिकों का देश प्रेम ही देश के भविष्य की राह प्रशस्त करता है। नागरिकों के सहयोग के बल पर ही कोई राष्ट्र सम्पन्नता के शिखर पर पहुंच सकता है। आज के वर्तमान परिपेक्ष्य में हमें जितने भी राष्ट्र सशक्त और संपन्न दिख रहे हैं, उन सभी का एकमात्र आधार उस देश के नागरिक ही हैं। सांस्कृतिक, आर्थिक व राजनीतिक आदि कई तरह की विषमताएं दुनिया के सभी देशों में व्याप्त हैं पर शायद ही कोई ऐसा देश होगा जहां पर नागरिकों में अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम का भाव व उस भाव में एकमतता न हो। जब बात देश की हो या फिर देश हित की हो तो हम सभी को एकमत होकर सिर्फ और सिर्फ देश के हित के लिए समर्पित हो जाना चाहिए। भारत में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिलता है परन्तु सिर्फ मानसिक रूप से ही देश भक्त होने से देश का भला और हमारा भला नहीं हो सकता है। मैं बात करना चाहता हूं जापान की जो क्षेत्रफल में छोटा है पर अपने कार्यों में हमसे कहीं बड़ा है। जापान में प्रथम विश्व युद्ध के पहले से ही लोगों के अन्दर देश प्रेम की भावना भरी हुयी थी जिसे दो विश्व युद्धों ने उस भावना को और भी प्रबल किया। जापान के नागरिकों में देश प्रेम का उदाहरण देने के लिए मैं एक बात कहना चाहूंगा कि वहां पर जो भी सामाजिक कार्य हैं अथवा सार्वजनिक सम्पत्ति हैं, उसके संरक्षण और उसकी व्यवस्था की जिम्मेदारी को स्वयं जापानी नागरिक निभाते हैं। यदि किसी पार्क में गंदगी है तो बिना सोचे कोई भी व्यक्ति सफाई करने लगता है। एक व्यक्ति को देख कर कई लोग एकत्रित होते जाते हैं। और सबसे बड़ी बात यह कि उस सफाई में सहयोग करने वाला अपने पद को नहीं देखता है। परन्तु यदि हम अपने देश की बात करें तो हमारे दिमाग में एक ही चीज भरी हुई है कि जो सार्वजनिक सम्पत्ति है उसकी देखरेख की एकमात्र जिम्मेदारी सरकार की है। सिर्फ एक छोटा सा कारण ही हमें जागरुक नागरिक बनने से रोक लेता है औऱ वह यह है कि हम कोई भी जिम्मेदारी निभाने से बचना चाहते हैं और सरकार को ही सभी कामों के लिए जिम्मेदार मान बैठे हैं। जिस दिन हमारे अन्दर अपने औऱ सार्वजनिक कार्यों के प्रति जिम्मेदारी का भाव आ जाएगा उसी दिन से हमारे अन्दर से एक सच्चा देश प्रेमी बाहर निकल कर दुनिया के सामने स्पष्ट दिखने लगेगा।

          भावनात्मक रूप से ही देश प्रेमी होना पर्याप्त नहीं है। आज के समय में आवश्यकता है कार्यात्मक रूप से देश प्रेम करके दिखाने की। इसके लिए किसी के पहल का इंतजार करना भी नहीं चाहिए। बल्कि अवसर का लाभ लेकर स्वयं पहल कीजिए। वैसे भी देश में सिर्फ इंजन की कमी रहती है, डिब्बे तो अपने आप ही मिलते रहते हैं और साथ में जुड़ते रहते हैं।
 आज के गणतंत्र दिवस के अवसर पर हम सभी भारतीयों को एक प्रण लेना होगा कि हम सिर्फ मेरा के भाव से ऊपर उठकर हमारा का भाव अपने अन्दर लाएगे। साथ देश की सभी सार्वजनिक संपत्ति के रख-रखाव, साफ-साफाई करने का पूर्ण प्रयास करेगें। इसके लिए अधिक परिश्रम की भी आवश्यकता भी नहीं है। यदि हर व्यक्ति सप्ताह में एक घण्टे भी इस तरह के कार्य में सहयोग करे तो पूरे भारत का कायाकल्प हो जाएगा।


        अपने आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर को भूल कर भारतीय बन जाइए औऱ फिर देखिए कि हम हमारे देश में कितना सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं। परन्तु इसके लिए किसी एक को नहीं बल्कि हम सभी को एक साथ उठकर सहयोग की भावना नहीं बल्कि देश प्रेम की भावना के साथ जुड़ना होगा और दुनिया को दिखाना होगा कि हम भावनात्मक ही नहीं बल्कि कार्यात्मक रूप से भी देश प्रेम में सर्वोपरि हैं।  


          देश हमारा है तो देश से जुड़े कार्य भी हमारे ही है। एक-एक होकर नहीं बल्कि एक साथ होकर ही हम अपने राष्ट्र को विश्व पटल पर शीर्ष पर स्थापित कर सकेंगे। 

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