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Showing posts from May, 2018

ब्राह्मण का बेटा

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                               ब्राह्मण का बेटा          चन्द्रशेखर पाण्डेय जी बलिया (उत्तर प्रदेश) के छोटे से गांव में रामनगर में रहते हैं। चन्द्रशेखर जी धार्मिक और कर्मकांडी ब्राम्हण हैं। पुरखों से मिली दो एकड़ जमीन से तो जीवन यापन होना मुश्किल है, इसलिए पाण्डेय जी ने पुरोहित का काम करना चालू कर दिया। वे अकसर बताया करते हैं कि उनके दादा जी के पास सत्तर एकड़ जमीन हुआ करती थी, पर अपने उदार स्वभाव के कारण ज्यादातर जमीन जरूरत मंदों को दे दी। पाण्डेय जी के पिता जी हरिशंकर पाण्डेय जी को अपने पिता से ग्यारह एकड़ जमीन मिली पर पत्नी के इलाज में नौ एकड़ जमीन बिक गई और जो बची वो पाण्डेय जी को विरासत में मिली। खैर पाण्डेय जी को इस बात को तनिक भी मलाल नही है कि उनके दादा जी की उदार प्रवृत्ति के कारण उन्हें आज आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है बल्कि उन्हें तो इस बात का फक्र है कि दादा जी ने गरीबों की मदद की।  ...

वर्तमान में देवर्षि नारद की प्रासंगिकता

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            वर्तमान में देवर्षि नारद की प्रासंगिकता          आज के समय में पत्रकारों की स्थिति चिंता का विषय बन गई है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, पर यहां पर हम आदि पत्रकार के रूप में पूज्य नारद जी को आदर्श मानते हुए वर्तमान के पत्रकारों की परिस्थिति को दर्शाना चाहते हैं। सर्वपूज्य- नारद जी का महत्व मात्र देवताओं में ही नहीं अपितु राक्षसों में भी रहा है। उन्हें तीनों लोकों के हर एक व्यक्ति ने समान महत्व दिया है। उसके पीछे का कारण उनकी प्रवृत्ति रही है। नारद जी ने कभी किसी का अहित नहीं किया और न ही यह प्रयास किया कि वह पक्षपात करें। जितना मान उन्हें देवताओं ने दिया उससे कहीं अधिक सम्मान राक्षसों ने भी किया है। वर्तमान में पत्रकारों को सत्ता और विपक्ष दोनों के द्वारा समान सम्मान मिलना   चाहिए। अवध्य- नारद जी कटु वक्ता के रूप में भी जाने जाते हैं। यह स्वाभाविक भी है, क्योंकि जो व्यक्ति सत्य बोलता है वह मृदु वक्ता नहीं हो सकता है। कटु वक्ता होने के बावजूद भी नारद जी के सम्मान और जीवन पर कभ...