स्वाद के कारण
आज  के समय सबसे अधिक चर्चा गौमांस पर हो रही है और चिंता की बात तो यह है कि इसको हवा देने का काम महान तथा कथित हिंदू महान भावों के माध्यम से हो रहा है । हम तर्क देते हैं कि भोजन करने और उसके चयन का अधिकार सभी को है । पर यह अधिकार तब तक ही है जब तक हम किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत न करें पर आज के परिद्रश्य में देखे तो इसका उपयोग मात्र और एक मात्र धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुचाने के लिए ही किया जा रहा है । क्या हमेशा के लिये धार्मिक सद्भाव  की जिम्मेदारी सिर्फ हिंदूओं की ही है ।यह एक अच्छा अवसर है हमारे मुस्लिम और इसाई भाइयों के लिय़े है,उन्हें सार्वजनिक मंचों पर आ कर समाज में सामंजस्य के लिए अपना योगदान देने के लिये हिन्दुओं का साथ देना चाहिए । इस अवसर पर इनको आगे बड़कर गोमांस के मुद्दे पर हिन्दुओं का साथ देकर हिन्दु भावनाओं की रक्षा करनी चाहिए ।
                 सिर्फ मौन रहना ही समाधान नही हो सकता है , जबतक कि खुले मंच पर बोला न जाए और इससे उपयुक्त समय कोई नही हो सकता है । यदि आप लोग  (मुस्लिम और इसाई) का खुलकर विरोध करेगें तो न सिर्फ यह मुद्दा शान्त होगा बल्कि देश को एक नया आयाम हासिल होगा । आपसी सामंजस्य की एक नई मिशाल कायम होगी । यदि आज कोई कुछ नही बोला तो इसका दुस्परिणाम दूरगामी होंगे । देश धर्म के मुद्दे पर पिसता चला जाएगा । और इसका प्रभाव किसी जाति विशेष पर न पड़ कर सबको अपनें सुरषा मुख समाहित कर लेगा । और हमारे पास सिर्फ पछतावा ही होगा ।
              आगे बड़ने के लिये सभी का सहयोग जरूरी होता है  और आज सहयोग का समय मुस्लिम और इसाई भाइयों का है । अगर सही निर्णय सही सही समय से नही लिया गया तो देश का भविष्य गर्त में होगा और वह भी स्वाद के कारण ।

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