नारी की शक्ति
जब स्त्री भोग्या बन जाए,
रिस्ते नाते भंगुर हो जाएं।
जब भीष्म मूक हो बैठा हो,
द्रोढ़ाचार्य निस्क्रीय हो जाए।
जब लाज लगी हो दांव पर,
तुम महाभारत संग्राम करा देना।
भाई से भाई मरवा देना,
सौ के शौ गिरवा देना।
जब शब्द न हो कुछ कहने को,
और समय न हो कुछ सहने को।
हर तरफ आसुरी वृत्ति फैली हो,
मानवता भी जहरीली हो।
तुम नरमुंडों का अम्बार लगा देना,
काली का तांडव दिखला देना।
ध्यान इधर भी देना होगा,
जब मर्यादाओं का गहना होगा।
एक लक्ष्मण रेखा स्वयं की होगी,
जिसमें चरित्र की दृढ़ता होगी।
तब रावण भी न छू पाएगा,
त्रिलोक भी तिनके सा नजर आएगा।
त्रिदेवों को अपना शिशु बना,
अपना मात्रत्व दिखा देना।
तुम सीता, अनुसुइया बन,
अपनी शक्ति दिखा देना।
भारत की नारी क्या है,
सम्पूर्ण जगत को बता देना।
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