महिला शोषण
प्रथा के नाम पर महिलाओं का शोषण....
भारत में किराए की कोख पर किसी हद तक
नियंत्रण लगा दिया गया है पर देश के अनेक हिस्सों में आज भी अनेक कुप्रथाएं
वादस्तूर जारी हैं, जो महिलाओँ के लिए अभिशाप हैं और इन पर रोक लगाना बहुत ही
जरूरी है। उन्हीं कुरीतियों में से एक है किराए की बीवी बनाने की प्रथा।
जहां एक ओर हम महिला सशक्तिकरण और महिलाओं के अधिकारों की बात कर रहे हैं, वही
दूसरी ओर देश में मौजूद कुछ कुप्रथाओं ने इन सब बातों पर पानी फेर रखा है। हमारे
देश में कठोर कानून होने के बावजूद भी आज महिलाओं की खरीद फरोख्त के मामले सुनने
को मिलते रहते हैं। जिनके परिणाम स्वरूप महिलाओं को जिस्मफरोशी के धन्धे में उतार
दिया जाता है। लेकिन इन सब के बावजूद कुछ कुप्रथाएं आज भी जारी हैं जो महिलाओँ के
अधिकारों का हनन कर रही हैं और इस समस्या पर न ही सरकार का रुख स्पष्ट हो रहा है और न ही समाज के
ठेकेदारों की आंखें खुल पा रही हैं।
भारत के बड़े और शिक्षित राज्यों की
श्रेणी में आने वाले राज्य मध्य प्रदेश के शिवपुरी नामक जगह पर ‘ धड़ीचा प्रथा ‘ के नाम पर महिलाओं को एक वर्ष के लिए खरीद कर
अपनी बीवी के रूप में रखा जाता है। इसके लिए एक मेले का आयोजन होता है, जिसमें
लड़कियों को 10 हजार से 25 तक में खरीदा और बेंचा जाता है। खरीदनें वाला लड़की को
अपने पास एक वर्ष तक साथ रख सकता है। यदि वह चाहे तो कुछ और पैसे देकर इस समय सीमा
को अधिक भी करवा सकता है। इस परम्परा में माता-पिता ही अपनी बेटियों को बेचते हैं।
पूरी प्रक्रिया की 10 या 100 रुपये के स्टाम्प पेपर पर लड़कियों के खरीद फरोख्त की
बकायदा लिखा-पढ़ी भी होती है।
विस्मय की बात तो यह
है कि ये परम्परा प्रशासन के नाक तले होती है और सरकार के साथ-साथ सामाजिक संगठन
भी इस कुप्रथा के खिलाफ आवाज नही उठा रहे हैं और पुरुष प्रधान समाज में महिलाओ के
अधिकारों का हनन होता जा रहा है।
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